10th Social Science Examination 2024 :- बिहार बोर्ड मैट्रिक सामाजिक विज्ञान परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

10th Social Science Examination 2024 :- बिहार बोर्ड मैट्रिक सामाजिक विज्ञान परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

10th Social Science Examination 2024 :- बिहार बोर्ड मैट्रिक सामाजिक विज्ञान परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

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यदि आप अभी बिहार बोर्ड से 2024 में मैट्रिक का परीक्षा देने के लिए तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए किस आर्टिकल के माध्यम से सामाजिक विज्ञान का महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न बताया गया जो सीधे आपके परीक्षा में मिलने वाला है तो चलिए आप लोग नीचे हिंदी का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन याद कर ले ताकि आपको एग्जाम में अच्छा सा अच्छा नंबर मिले ।

 

1 . जातिप्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?

उत्तर : –

भारत में प्रचलित जातिप्रथा किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के अनुकूल पेशा चुनने की स्वतंत्रता नहीं देती। इस प्रथा में प्रत्येक व्यक्ति अपने पैतृक पेशा से बँधने को विवश है, पेशा में परिवर्तन की अनुमति न देकर भारतीय जातिप्रथा बेरोजगारी का प्रमुख तथा प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।

2 . काशू और मदन के बीच झगड़ों का कारण क्या था? इस प्रसंग के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है ?

उत्तर : –

काशू ने मदन और उसके मित्रों को लट्टू नचाते देखा, तो उसकी तबीयत मचल गई। वह भी लट्टू नचाना चाहता था। पर, काशू से अपमानित प्रताड़ित मदन नहीं चाहता था कि काशू लट्टू नचाए। इसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। इस प्रसंग द्वारा लेखक (कहानीकार) आहत बाल मन की प्रतिक्रियाओं को प्रस्तुत करना चाहता है।

 

3 . लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों?

उत्तर : –

लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन शहरों और महानगरों में नहीं, इसके गाँवों में हो सकते हैं, क्योंकि गाँवों में ही भारत की आत्मा वास करती है।

 

4 . बहादुर पर ही चोरी का आरोप क्यों लगाया जाता है और उस पर इस आरोप का क्या असर पड़ता है ?

उत्तर : –

चोरी का आरोप प्रायः निर्धनों पर ही लगता है। बहादुर घर का नौकर है और गरीब है। अतः, लेखक के घर आया उसका दूर का संबंधी उसी पर अपने पैसों की चोरी का आरोप लगाता है। परिणामस्वरूप, बहादुर गालियों और डंडे की मार भुगतकर लेखक का घर छोड़कर भाग जाता है।

5 . कवि किन अत्याचारियों का और क्यों जिक्र करता है?

 

उत्तर :-

कवि सांप्रदायिक विद्वेष को आधार बनाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए अत्याचार करनेवालों का जिक्र करता है। कवि अत्याचारियों का जिक्र जनता को इनके विरुद्ध जगाने के लिए करता है।

 

6 . कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार क्यों लगता था ?

उत्तर : –

कवि (कुँवर नारायण) ने वृक्ष की तुलना बूढ़े चौकीदार से की है। वृक्ष की छालरूपी चमड़ी झुर्रियों से भरकर खुरदरी हो गई है। बुढ़ापे से उसका तना मैला-कुचैला हो गया है। उसकी सूखी हुई एक डाल राइफल-सी उसके कंधे से टंगी हुई है। फूल-पत्तीदार टहनियाँ उसकी पगड़ी है, कूबड़ जड़े उसके फटे-पुराने जूते हैं।

 

7 . कवि अपने को जलपात्र और मदिरा क्यों कहता है?

उत्तर : –

भक्त कवि की जीवात्मा परमात्मा का जलपात्र है जिसमें परमात्मा के (उनके) गुण जलरूप में संगृहीत है। परमात्मा ने कवि के जीवात्मा रूपी जलपात्र में मदिरारूपी आनंद को सँभालकर रखा है।

 

8 . मंगम्मा का अपनी बहू के साथ किस बात को लेकर विवाद था ?

उत्तर : –

मंगम्मा का अपनी बहू के साथ बेटे को लेकर विवाद था। वह (मंगम्मा) अपने बेटे पर अपना पूरा अधिकार समझती थी और उसकी बहू अपने पति पर अपना पूरा हक समझती थी। विवाद का दूसरा कारण था दोनों के बीच स्वतंत्रता का विचार।

 

9 . माँ कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।

उत्तर : –

 

‘माँ’ शीर्षक कहानी में शुरू से अंत तक माँ के चरित्र को प्रमुखता दी गई है। यह कहानी माँ के मनोविज्ञान को पूर्णता में प्रस्तुत करती है। अतः, कहानी का शीर्षक ‘माँ’ सर्वथा सार्थक है।

 

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10 . सीता अपने ही घर में क्यों घुटन महसूस करती है?

 

उत्तर : –

विधवा सीता अपने बेटों के ‘फर्ज’ की चक्की में पिस रही है। उसके घर में सब कुछ है, पर एक चीज की कमी है। वह है पारिवारिक सुख-शांति तथा आत्मीयता का अभाव। अतः, सीता अपने ही घर में घुटन महसूस करती है।

 

11 . नील उत्पादक किसानों की स्थिति कैसी थी ?

उत्तर : –

 

नील उत्पादक किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।

 

12 . किसान नील की खेती क्यों नहीं कराना चाहते थे

उत्तर : –

किसान नील की खेती नहीं करना चाहते थे, क्योंकि इससे भूमि की उर्वरता कम हो जाती थी।

 

13 . दुर्गा पूजा पर एक निबंध लिखे जो 200 से 300 शब्दों में होना चाहिये ?

उत्तर : –

भूमिका –

भारतीय पर्वों में दुर्गापूजा का अन्यतम स्थान है। यद्यपि यह पूर्वी भारत का प्रमुख सव है तथापि यह विभिन्न रूपों में समूचे भारत में मनाई जाती है।
पर्व मनाने के पीछे धार्मिक कथाएँ—दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना गया है। वेदों और निषदों में भी शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा का उल्लेख मिलता है। अर्जुन ने दुर्गा का स्तवन किया मार्कण्डेय पुराण और देवी भागवत में महाशक्ति चंडिका का गौरवगान किया गया है। राम ने दुर्गा की राधना की और उनसे अपरिमित बल एवं शौर्य प्राप्त कर रावण का वध किया। राम की इस विजय की नृति में ‘दशहरा’ व ‘विजयदशमी’ का पर्व मनाया जाता है। दुर्गापूजा का पर्व आसुरी प्रवृत्तियों पर दैनी वृत्तियों की विजय का पर्व है।

मनाने का समय-

यह पर्व लगातार दस दिनों तक मनाया जाता है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को कलश स्थापन होता है और उसी दिन से माँ दुर्गा की आराधना शुरू हो जाती है।
‘प्राण-प्रतिष्ठा’ की जाती है। उस दिन से नवमी तक माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना विधिपूर्वक एवं विशेष सात्विकता के साथ की जाती है।

उपसंहार –

दुर्गापूजा सांस्कृतिक पर्व है। माँ दुर्गा की आस्थापूर्ण आराधना-अर्चना करने से हमारे संस्कार परिशुद्ध एवं सात्त्विक होते हैं। आस्था, भक्ति, पवित्रता, सात्त्विकता, आत्मिक उल्लास एवं आध्यात्मिक उन्नयन के इस पर्व को वैभव-प्रदर्शन से कभी दूषित नहीं करना चाहिए। चिंता का विषय यह है कि इस पर्व से आस्था का रंग उड़ता जा रहा है और आडंबरप्रियता बढ़ती जा रही है। दुर्गा शक्ति की देवी है। हमें उनसे शारीरिक, बौद्धिक, वैचारिक एवं आध्यात्मिक शक्ति की माँग करनी चाहिए ताकि हम समाज और राष्ट्र का कल्याण कर सके।

 

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नोट : –

यदि आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे तो हमारे इससे जुड़ी और भी आर्टिकल में मैट्रिक का सभी विषय का सब्जेक्टिव एवं ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन को तैयारी किया जाता है तो इस वेबसाइट को जरूर फॉलो कर ले ताकि आपको हर विषय में सबसे महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव एवं ऑब्जेक्टिव प्रश्न मिलता रहे ।

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